मक्के की फसल में भरपूर और वजनदार भुट्टे लाने का यह सुनहरा मौका है। अगर इस समय सही दवा और टॉनिक का इस्तेमाल कर लिया, तो 50–60 क्विंटल तक पैदावार लेना सपना नहीं, हकीकत हो सकती है। लेकिन अगर इस अहम मौके पर आखिरी स्प्रे करना भूल गए, तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। फैसला आपके हाथ में है — आखिरी स्प्रे करेंगे या नहीं?
आखिरी स्प्रे कब करना है?
जब मक्का 75–80 दिन का हो जाता है, तब फसल भुट्टे बनने की अवस्था में होती है। यही समय है जब सही प्रोडक्ट से आखिरी स्प्रे करना चाहिए। इसी समय इल्ली का अटैक सबसे ज्यादा होता है — चाहे वो फॉल आर्मी वर्म हो, स्टेम बोरर, तंबाकू इल्ली, सेमी लूपर या पत्ते खाने वाली इल्ली। ये पत्तियों में छेद करके भुट्टों तक पहुंच जाती हैं और दानों को खा जाती हैं, जिससे फसल को भारी नुकसान होता है।
फॉल आर्मी वर्म का सबसे बड़ा खतरा
फॉल आर्मी वर्म मक्के की सबसे खतरनाक दुश्मन है। यह पौधे के तने में छिपकर अंडे देती है और लार्वा निकलते ही पौधे को खोखला कर देती है। भुट्टा बनने से पहले ही फसल की ग्रोथ रुक जाती है। अगर भुट्टा बन भी जाए, तो यह अंदर घुसकर दाने खा जाती है, जिससे भुट्टों पर काले निशान और अधूरे दाने रह जाते हैं।
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कीटों से बचाव के लिए पावरफुल कीटनाशक
आखिरी स्प्रे के समय एक पावरफुल और आधुनिक कीटनाशक का इस्तेमाल जरूरी है। इसके लिए क्लोडा सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसमें क्लोरेंटाइलीप्रोल 9.3% और लैम्डा साइलोथ्रिन 4.6% ZC का खास मिश्रण है। क्लोरेंटाइलीप्रोल पत्तियों से लेकर डंठल तक फैलकर पूरे पौधे को सुरक्षा देता है, जबकि लैम्डा साइलोथ्रिन तुरंत असर दिखाते हुए कीटों को खत्म करता है।
जैसे ही इल्ली पत्ता या भुट्टा खाती है, उसका खाना बंद हो जाता है और वह मर जाती है। लैम्डा साइलोथ्रिन कांटेक्ट एक्शन से इल्ली के नर्वस सिस्टम को डैमेज कर देता है, जिससे वह पैरालाइज होकर खत्म हो जाती है। डोज़: 100 ml प्रति एकड़।
नीम ऑयल का असर
क्लोडा के साथ एक्टिवेटेड नीम ऑयल का उपयोग और भी प्रभावी है, खासकर जब इल्ली का प्रकोप ज्यादा हो। नीम ऑयल पत्तियों में कड़वापन ला देता है, जिससे इल्ली खाना छोड़ देती है। यह कीटों की हर अवस्था पर असर करता है। डोज़: 400–600 ml प्रति एकड़। अगर प्रकोप कम है, तो सिर्फ क्लोडा का छिड़काव पर्याप्त है।
वजनदार और भरे हुए भुट्टों के लिए टॉनिक
ज्यादा दाने और दानों का वजन बढ़ाने के लिए भन्नाट सबसे बेहतर टॉनिक है। यह प्लांट बायोस्टिमुलेंट है, जिसमें L-सीरीज अमीनो एसिड, अल्कलॉइड्स, विटामिन और सीवीड एक्सट्रैक्ट मौजूद है। यह भुट्टों को भरने, दानों का आकार बढ़ाने और पौधे को तनाव से बचाकर ग्रोथ को बेहतर करता है।